Friday, 13 September 2019

हिंदी दिवस

हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। 14 सितंबर, 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी। इस निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने और हिंदी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए 1953 से भारत में 14 सितंबर को हर साल हिंदी दिवस मनाया जाता है। लेकिन हिंदी को यह दर्जा इतना आसानी से नहीं मिल गया। इसके लिए लंबी लड़ाई चली थी, जिसमें व्यौहार राजेंद्र सिंह ने अहम भूमिका निभाई थी। अंतत: उनके 50वें जन्मदिवस अर्थात 14 सितंबर, 1949 को हिंदी को भारत की राजभाषा का दर्जा मिला। आइये आज इस मौके पर जानते हैं कि राजेंद्र सिंह के अलावा और किन लोगों ने हिंदी के गौरव की लड़ाई लड़ी थी, इस दिन क्या-क्या होता है और कौन-से पुरस्कार दिए जाते हैं..
व्यौहार राजेन्द्र सिंह का जन्म 14 सितंबर, 1900 को जबलपुर में हुआ था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करवाने के लिए काका कालेलकर, मैथिलीशरण गुप्त, हजारी प्रसाद द्विवेदी, सेठ गोविन्द दास के साथ मिलकर राजेन्द्र ने काफी प्रयास किए। इसके चलते उन्होंने दक्षिण भारत की कई यात्राएं भी कीं।

व्यौहार राजेन्द्र सिंह हिंदी साहित्य सम्मलेन के अध्यक्ष रहे। उन्होंने अमेरिका में आयोजित विश्व सर्वधर्म सम्मलेन में भारत का प्रतिनिधित्व किया जहां उन्होंने सर्वधर्म सभा में हिंदी में ही भाषण दिया जिसकी जमकर तारीफ हुई। संस्कृत, बांग्ला, मराठी, गुजराती, मलयालम, उर्दू, अंग्रेज़ी आदि पर उनका अच्छा अधिकार था। उनका निधन 2 मार्च, 1988 को हुआ था।
इस मौके पर राजभाषा गौरव पुरस्कार और राजभाषा कीर्ति पुरस्कार दिया जाता है। राजभाषा गौरव पुरस्कार लोगों को दिया जाता है जबकि राजभाषा कीर्ति पुरस्कार किसी विभाग, समिति आदि को दिया जाता है।
राजभाषा गौरव पुरस्कार

यह पुरस्कार तकनीकी या विज्ञान के विषय पर लिखने वाले किसी भी भारतीय नागरिक को दिया जाता है। इसमें दस हजार से लेकर दो लाख रुपये के 13 पुरस्कार होते हैं। इसमें प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने वाले को ₹2,00,000 व द्वितीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले को ₹1,50,000 और तृतीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले को ₹75,000 रुपये मिलता है। साथ ही 10 लोगों को प्रोत्साहन पुरस्कार के रूप में ₹10,000 रुपये मिलता है। पुरस्कार प्राप्त सभी लोगों को स्मृति चिह्न भी दिया जाता है। इसका मूल उद्देश्य तकनीकी और विज्ञान के क्षेत्र में हिंदी भाषा को आगे बढ़ाना है।
राजभाषा कीर्ति पुरस्कार
इस पुरस्कार योजना के तहत कुल 39 पुरस्कार दिए जाते हैं। यह पुरस्कार किसी समिति, विभाग, मंडल आदि को उसके द्वारा हिंदी में किए गए श्रेष्ठ कार्यों के लिए दिया जाता है। इसका मूल उद्देश्य सरकारी कार्यों में हिंदी भाषा का उपयोग करने से है।

Wednesday, 4 September 2019

Teachers' Day 2019: A Day That Honours Sarvepalli Radhakrishnan



Teachers' Day tradition started from 1962 and it was started to honour Dr Sarvepalli Radhakrishnan.

 Teachers' Day is dedicated to our teachers, mentors and gurus who guide us to be learned students and better human beings. Every year, Teacher's Day is celebrated on September 5, the birth anniversary of Dr Sarvepalli Radhakrishnan. "Instead of celebrating my birthday, it would be my proud privilege if September 5 is observed as Teachers' Day," he had said. This tradition to celebrate Teachers' Day started from 1962 and it was started to honour Dr Sarvepalli Radhakrishnan and all the teachers.
Dr Sarvepalli Radhakrishnan was a philosopher, scholar, an exemplary teacher, and politician who dedicated his life towards education and shaping up the youth of the country. He was also the first Vice-President of India and the second President of India. His contributions in the field of education are exemplary.

Dr Sarvepalli Radhakrishnan was born on September 5, 1888, in a middle class family in Tirutani. He was an outstanding student and studied philosophy at Christian College, Madras. He taught at various colleges in his lifetime from University of Mysore to University of Calcutta. He was also appointed as the Vice-Chancellor of Andhra University, Delhi University as well as Banaras Hindu University.

He was awarded the Bharat Ratna, the highest civilian honour in the country in 1954. Dr Sarvepalli Radhakrishnan was nominated 27 times for the Nobel Prize; 16times for the Nobel Prize in literature, and 11 times for the Nobel Peace prize.
https://www.ndtv.com/india-news/teachers-day-2019-date-time-history-significance-all-you-need-to-know-about-sarvepalli-radhakrishnan-2095075

Monday, 2 September 2019

JEE 2020 का नया सिलेबस: फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स से आएंगे कम सवाल

अब तक वही विद्यार्थी बैचलर ऑफ प्लानिंग कोर्स में प्रवेश के योग्य होते थे जिन्होंने 12वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमैटिक्स पढ़े हों। लेकिन, अब क्रिटेरिया बदल गया और अब 12वीं के लिए सिर्फ मैथ्स ही अनिवार्य रह गया है।

हाइलाइट्स
JEE (Main) 2020 की पहली परीक्षा 6 से 11 जनवरी जबकि दूसरी परीक्षा 3 से 9 अप्रैल के बीच होगी
6 से 11 जनवरी तक होने वाले पहले एडिशन के एग्जाम के लिए रजिस्ट्रेशन 3 सितंबर से शुरू
इस बार सिर्फ बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर में प्रवेश के लिए ही ड्रॉइंग पेपर देना होगा
जिन विद्यार्थियों ने 12वीं में सिर्फ मैथ्स पढ़े हैं, वे भी अब JEE में भाग ले सकेंगे

मानस गोहेन, नई दिल्ली
12वीं कक्षा में गणित पढ़ने वाले अब हर स्ट्रीम के प्रतिस्पर्धी को बैचलर्स इन प्लानिंग कोर्स की प्रवेश परीक्षा में भाग लेने का मौका मिलेगा। जनवरी 2020 में होने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा (मुख्य) यानी जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (मेन) में जो बदलाव देखने को मिलेंगे, उनमें यह प्रमुख है। पिछले 20 वर्षों में पहली बार जेईई (JEE) के सभी प्रतिस्पर्धियों को भौतिकी (फिजिक्स), रसायन (केमिस्ट्री) और गणित (मैथमैटिक्स) के कम सवालों का सामना करना पड़ेगा। वहीं, आर्किटेक्चर कोर्स में भाग लेने के इच्छुक प्रतिस्पर्धियों को भी इंजिनियिरिंग ड्रॉइंग के कम सवाल ही हल करने होंगे। JEE केंद्र सरकार से फंडेड सभी तकनीकी संस्थानों और कॉलेजों में प्रवेश की परीक्षा है।
अब तक वही विद्यार्थी बैचलर ऑफ प्लानिंग कोर्स में प्रवेश के योग्य होते थे जिन्होंने 12वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमैटिक्स पढ़े हों। लेकिन, अब क्रिटेरिया बदल गया और अब 12वीं के लिए सिर्फ मैथ्स ही अनिवार्य रह गया है। साथ ही, जो लोग बैचलर ऑफ प्लानिंग कोर्स में प्रवेश लेना चाहते हैं, उनसे ड्रॉइंग टेस्ट नहीं लिया जाएगा। अब ड्रॉइंग टेस्ट सिर्फ आर्किटेक्स कोर्स की प्रवेश परीक्षा में ही लिया जाएगा।
JEE (Main) के लिए रजिस्ट्रेशन आज से शुरू
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इन बदलावों पर अपनी मुहर लगा दी। जेईई (मुख्य) परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन आज से शुरू हो गया। JEE के 15 वर्षों में पहली बार सवालों की संख्या घटा दी गई है और प्रश्नों के प्रकार भी बदल दिए गए हैं। पहले, इंजिनियरिंग (बीई/बीटेक) ऐस्पिरेंट्स को 30-30 मल्टिपल चॉइस क्वेश्चंस के तीन पेपर- मैथमैटिक्स, फिजिक्स और केमिस्ट्री हल करने होते थे। अब तीनों पेपर में 30-30 की जगह 25-25 सवाल ही रहेंगे। इनमें 20-20 मल्टिपल चॉइस क्वेश्चंस होंगे जबकि शेष 5-5 सवाल न्यूमैरिकल वैल्यु के जवाब के साथ आएंगे और तीनों पेपर का वेटेज बराबर होगा।

वहीं, बीआर्क (बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर) कोर्स के लिए मैथमैटिक्स पेपर में 25 सवाल होंगे जिनमें 20 मल्टिपल चॉइस जबकि पांच ऑब्जेक्टिव टाइप होंगे। सथ ही, ड्रॉइंग पेपर के सवाल भी तीन से घटाकर दो कर दिए गए। मल्टिपल चॉइस क्वेश्चंस फॉर्मेट में 50 नंबर का ऐप्टिट्यूड टेस्ट भी है।
बैचलर ऑफ प्लानिंग और बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर प्रवेश परीक्षा के लिए मैथमैटिकिस और ऐप्टिट्यूड टेस्ट पेपर एक समान होंगे। हालांकि, पिछले वर्ष से इतर इस बार बैचलर ऑफ प्लानिंग के अभ्यर्थियों को ड्रॉइंग पेपर नहीं देना होगा बल्कि उन्हें प्लानिंग पर 25 मल्टिपल चॉइस क्वेश्चंस हल करने होंगे। JEE (Main) 2020 की पहली परीक्षा 6 से 11 जनवरी जबकि दूसरी परीक्षा 3 से 9 अप्रैल के बीच होगी।

Source: https://navbharattimes.indiatimes.com/education/education-news/jee-revamp-fewer-questions-from-physics-chem-maths/articleshow/70953998.cms

For Syllabus JEE Main 2020

JEE Main 2020 के रजिस्ट्रेशन से पहले तैयार कर लें ये डॉक्युमेंट्स



JEE Main 2020 के लिए 3 सितंबर से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू है। छात्र इस परीक्षा के लिए आवेदन करने से पहले जान लें कि उन्हें किन डॉक्युमेंट्स की जरूरत होगी।

नैशनल टेस्टिंग एजेंसी ने जॉइंट एंट्रेस एग्जामिनेशन यानी JEE Main 2020 के लिए 3 सितंबर से ऐप्लिकेशन फॉर्म जारी कर रही है। यानी इस परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अब शुरू हो जाएगी। जो भी छात्र इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट jeemain.nic.in या फिर nta.ac.in पर जाकर ऑनलाइन रजिस्टर कर सकते हैं।

लेकिन (JEE) मेन 2020 के लिए अप्लाई करने से पहले छात्र उन सभी डॉक्युमेंट्स को तैयार करके रख लें, जिनकी फॉर्म भरते या रजिस्टर करते वक्त जरूरत पड़ेगी। इस परीक्षा के लिए 30 सितंबर तक ही आवेदन किए जा सकते हैं।

JEE Main 2020 के लिए जिन डॉक्युमेंट्स की जरूरत होगी, उनका ब्यौरा यहां दिया जा रहा है:

1- पासपोर्ट साइज फोटो की कॉपी
2- अपलोड करने के लिए सिग्नचर की कॉपी
3- 10वीं क्लास का सर्टिफिकेट जिसमें जन्म तिथि के बारे में जानकारी हो
4- 10वीं और 12वीं क्लास की मार्कशीट
5- एजुकेशन क्वॉलिफिकेशन सर्टिफिकेट्स
6- EWS, PWD, SC/ST या फिर कोई अन्य रिजर्वेशन सर्टिफिकेट (अगर लागू होता है तो)

साल में 2 बार होती है जी मेन की परीक्षा
बता दें कि (JEE) मेन 2020 की परीक्षा 6 जनवरी से 11 जनवरी तक देश के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। परीक्षा के लिए ऐडिमट कार्ड 6 दिसंबर को जारी किए जाएंगे। वहीं इस परीक्षा के परिणाम 31 जनवरी 2020 को घोषित किए जाएंगे। जेईई मेन एग्जाम का आयोजन साल में दो बार किया जाता है। पहला पेपर जनवरी और दूसरा अप्रैल में आयोजित किया जाता है। अप्रैल सेशन के लिए आवेदन प्रक्रिया 7 फरवरी से 7 मार्च 2020 तक आयोजित की जाएगी। ऐडमिट कार्ड 16 मार्च से उपलब्ध होंगे।

Source:https://navbharattimes.indiatimes.com/education/education-news/jee-main-2020-registration-begins-do-prepare-these-documents-first-hand/articleshow/70942446.cms

PUBLIC NOTICE JEE (Main) - 2020

Engineering Exam

Joint Entrance Examination (JEE) MAIN will be conducted by the NTA from 2019 onwards. This Examination was being conducted by the Central Board of Secondary Education (CBSE) till 2018.

JEE Main is applicable for admission to NITs, IIITs and CFTIs participating though Central Seat Allocation Board subject to the condition that the candidate should have secured at least 75% marks in the 12th class examination, or be in the top 20 percentile in the 12th class examination conducted by the respective Boards. For SC/ST candidates the qualifying marks would be 65% in the 12thclass examination.

Subject combinations required in the qualifying examination for admission to B.E./B.Tech. & B. Arch./B. Planning Courses in NITs, IIITs, and other CFTIs is as under:-

Course         Required Criteria based on Class 12th / Equivalent qualifying Examination
B.E/B.TECH Passed qualifying examination with Physics and Mathematics as compulsory subjects                          along with one of the Chemistry/Biotechnology/Biology/ Technical Vocational                                      subject.
B.ARCH.         Passed qualifying examination with Mathematics, Physics, Chemistry.
B.PLANNING Passed qualifying examination with Mathematics
The above mentioned policy could also be adopted by other Technical Institutions participating in counselling through JoSAA/CSAB. In case a State opts to admit students in the engineering Colleges affiliated to State Universities, the State may prepare separate rank list based on criteria decided by them.

हिंदी पखवाड़ा 2019



भारत सरकार के सभी कार्यालयों, उपक्रमों, उद्यमों, संस्थाओं में हिंदी पखवाड़ा हर वर्ष १४ सितंबर से २८ सितंबर अथवा १ सितंबर से १४ सितंबर तक मनाया जाता है। १४ सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत सरकार के केंद्रीय गृह मंत्रि जी का संदेश १४ सितंबर को प्रकाशित किया जाता है। केद्रीय हिंदी समिति के अध्यक्ष के नाते भारत के प्रधान मंत्री जी तथा महामहिम राष्ट्रपति जी का संदेश भी जारी किया जाता है। राजभाषा हिंदी के प्रति जागरुकता पैदा करने के लिए हिंदी पखवाडे के दौरान अनेक हिंदी कार्यक्रम, प्रतियोगिताएँ, कवि सम्मेलन, संगोष्ठी, भारतीय स्तर पर हर विभाग द्वारा राजभाषा सम्मेलन भी आयोजित करने का प्रावधान है। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में हिंदी में अधिक कार्य करनेवाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया जाता है। यह देखा जाता है कि हिंदी पखवाड़े के दौरान कार्यालयों में हिंदी पत्राचार में कितना प्रतिशत कार्य बढ गया है। मा, संसदीय राजभाषा निरीक्षण समिति कार्यालय का निरीक्षण करते समय इस बात पर उचित ध्यान देती है। हिंदी पखवाडे का आयोजन कार्यालय की सुविधानुसार हिंदी दिवस के पहले या बाद में किया जाता है।

प्रस्तावना- “हिंदी हैं हम, वतन है हिंदोस्तां हमारा” हम हिंदुस्तानी इस पंक्ति को हर जगह बड़े ज़ोर-शोर से गाते हैं। यह पंक्ति हम हिंदुस्तानियों के लिए अपने आप में एक विशेष महत्व रखती है। हर साल 14 सितंबर का दिन हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन भारत की संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी गई हिंदी भाषा को भारतीय गणराज्य की आधिकारिक भाषा घोषित किया था। यानि 14 सितंबर 1949 को भारतीय संविधान ने हिंदी भाषा को भारतीय गणराज्य की आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया था। 26 सितंबर 1950 को भारतीय संविधान द्वारा इसे आधिकारिक भाषा के रूप में इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी गयी।

हिन्दी दिवस (Hindi Diwas)
संविधान द्वारा हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा का दर्जा दिये जाने की खुशी में हम हिंदी दिवस मनाते हैं। संविधान के अनुच्छेद 343 में हिंदी भाषा को आधिकारिक भाषा के तौर पर अपनाने का उल्लेख मिलता है। हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे कि आखिर क्यों मानाया जाता है हिंदी दिवस, हिंदी दिवस की जानकारी के साथ साथ हम आपको ये भी बताएंगे कि हिंदी दिवस कब मनाया जाता है।

हिंदी दिवस कब और क्यों मनाया जाता है
प्रति वर्ष 14 सिंतबर का दिन हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। आपको बता दें कि 14 सितंबर 1949 के दिन ही हिंदी को भारतीय संविधान द्वारा भारतीय गणराज्य की आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया था। इसके अतिरिक्त हिंदी को बढ़ावा देने के लिए, हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए वातावरण पैदा करने के उद्देश्य से और हिंदी के प्रति लोगों में जागरुकता पैदा करने के उद्देश्य से हिन्दी दिवस मनाया जाता है।

हिंदी दिवस का महत्व
हिंदी दिवस उस दिन की याद में मनाया  जाता  है जिस दिन हिंदी हमारी आधिकारिक भाषा बनी। आज हमारी सरकार द्वारा हिंदी को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के कार्यक्रम चलाए जाए हैं। हिंदी दिवस के दिन कॉलेज और स्कूल स्तर पर विद्यार्थियों को हिंदी का महत्व बताया जाता है। इस दिन सभी सरकारी कार्यालयों में विभिन्न विषयों पर हिंदी में व्याख्यान आयोजित किये जाते हैं। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए हमारी वर्तमान सरकार का कदम सराहनीय है। आज देश के नेता विदेशों में जाकर भी हिंदी में भाषण देने को महत्ता दे रहे हैं। ऐसा इसिलए किया जा रहा है ताकि भारत के साथ-साथ विश्व स्तर पर भी हिंदी भाषा का महत्व समझा जाए। यह हमारी सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है तो हिंदी बोलने वालों की संख्या में लगातार इजाफा होता दिख रहा है। बिहार देश का पहला राज्य था जिसने हिंदी को अपनी आधिकारिक भाषा के तौर पर अपनाया था। हालांकि इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि भारत में अंग्रेजी बोलने वाले लोगों की तादाद में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है, लेकिन आज भी देश में हिंदी बोलने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है। देश की जनता का एक बडा़ हिस्सा आज भी हिंदी बोलता है। उत्तर भारत के कई राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा, झारखंड आदि में एक बड़ी आबादी हिंदी भाषी लोगों की है। इस बात को हमें हमेशा याद रखना चाहिये कि अपनी मात्र भाषा बोलने से न केवल हम अपनी संस्कृति से जुड़े रहते हैं बल्कि यह हमें एक दूसरे के करीब लाने का जरिया भी है।